इक्कीस सौ महिलाओं के सामूहिक ‘रामजी का सोहर’ से गूंजेगी बस्ती.....
बस्ती (आयुष्मान टाइम्स) जनपद बस्ती 25 मई को एक ऐसे ऐतिहासिक सांस्कृतिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है, जो जिले की लोक परंपरा, आस्था और सामाजिक एकता को नई पहचान देने का कार्य करेगा। जिले की 2100 माताएं, बहनें और बेटियां एक साथ पारंपरिक ‘रामजी का सोहर’ गाकर न केवल भारतीय लोकसंस्कृति को जीवंत करेंगी, बल्कि बस्ती की सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच तक पहुंचाने का संदेश भी देंगी। इस भव्य आयोजन को लेकर पूरे जिले में उत्साह, उमंग और गौरव का माहौल देखने को मिल रहा है।
रविवार को कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए विशाल पूर्वाभ्यास आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होकर पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ सहभागिता निभाई। पूर्वाभ्यास के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आया। महिलाओं की एकजुट स्वर लहरियों ने आयोजन की भव्यता का एहसास पहले ही करा दिया।
इस ऐतिहासिक पहल के पीछे पहल संस्था के संस्थापक मनीष मिश्रा की दूरदर्शी सोच और अथक प्रयास को प्रमुख माना जा रहा है। मनीष मिश्रा लंबे समय से बस्ती जिले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से जनजागरण का कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि किसी भी क्षेत्र की असली पहचान उसकी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता से होती है। इसी सोच को साकार करने के लिए ‘रामजी का सोहर’ जैसे पारंपरिक लोकगीत को एक विशाल सांस्कृतिक उत्सव का रूप दिया गया है।
मनीष मिश्रा ने कहा कि “हमारा उद्देश्य केवल एक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि बस्ती की सांस्कृतिक शक्ति और लोक परंपराओं को विश्व स्तर पर स्थापित करना है। बस्ती की पहचान उसकी मिट्टी, संस्कृति और सामाजिक एकता में बसती है। यदि हम अपनी विरासत को सहेजेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रहेंगी।”
आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार यह कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि पूरे जिले की आस्था, एकता और गौरव का महाउत्सव है। ‘रामजी का सोहर’ भारतीय लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर माना जाता है, जो शुभ अवसरों, धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। भगवान श्रीराम के स्मरण से जुड़ा यह लोकगीत समाज में प्रेम, भाईचारे और सांस्कृतिक चेतना का संदेश देता है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में समाजसेवी संस्थाएं, सांस्कृतिक संगठन और आम नागरिक भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति विशेष का आयोजन नहीं, बल्कि पूरे बस्ती जिले का गौरव उत्सव है। इसमें जाति, पंथ, विचारधारा और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है।
आयोजकों ने बस्तीवासियों से अपील करते हुए कहा कि सभी लोग एकजुट होकर इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनें और जिले की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपनी सहभागिता निभाएं। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और बस्ती के लिए गौरव का प्रतीक बनने जा रहा है।


