चाहे कैसी भी परिस्थिति हो, भगवत भजन कभी नहीं छोड़ना चाहिए-आचार्य विश्वामित्र त्रिपाठी

0 आकाश शुक्ला

 चाहे कैसी भी परिस्थिति हो, भगवत भजन कभी नहीं छोड़ना चाहिए-आचार्य विश्वामित्र त्रिपाठी


बस्ती (आयुष्मान टाइम्स) शिव नगर तुरकहिया  में राधेश्याम शुक्ल (एडवोकेट) यहां बीते रात चल रही साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकुष्ण रूकमणि  विवाह महोत्सव  बहुत धूमधाम से मनाया ।कथा वाचक आचार्य विश्वामित्र त्रिपाठी  ने श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए कहा कि चाहे कैसी भी परिस्थिति हो, भगवत भजन कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि प्रभु भाव के भूखे होते हैं और सच्ची श्रद्धा से की गई साधना कभी व्यर्थ नहीं जाती।कथा के दौरान  श्रोताओं ने गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा प्रकट की। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों की इस कामना को पूरी करने का वचन दिया। अपने वचन को पूरा करने के लिए भगवान ने महारास का आयोजन किया। इसके लिए शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों को मिलने के लिए कहा गया। सभी गोपियां सज-धजकर नियत समय पर यमुना तट पर पहुंच गईं। कृष्ण की बांसुरी की धुन सुनकर सभी गोपियां अपनी सुध-बुध खोकर कृष्ण के पास पहुंच गईं। उन सभी गोपियों के मन में कृष्ण के नजदीक जाने, उनसे प्रेम करने का भाव तो जागा, लेकिन यह पूरी तरह वासना रहित था। इसके बाद भगवान ने रास आरंभ किया। माना जाता है कि वृंदावन स्थित निधिवन ही वह स्थान है, जहां श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। यहां भगवान ने एक अद्भुत लीला दिखाई थी, जितनी गोपियां उतने ही श्रीकृष्ण के प्रतिरूप प्रकट हो गए। सभी गोपियों को उनका कृष्ण मिल गया और दिव्य नृत्य व प्रेमानंद शुरू हुआ। रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुऐ कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को हराकर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया। मौके पर आयोजक मंडली की ओर से आकर्षक वेश-भूषा में श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत कर विवाह संस्कार की रस्मों को पूरा किया गया। 

राम निरंजन पाण्डेय  (वैदिक आचार्य)रामयज्ञ उपाध्याय,(जापक)अरूण शास्त्री, मुकेश शुक्ल (तबला वादक)  ने सहभागिता रही ।

कथा के साथ-साथ भजन संगीत भी प्रस्तुत किया गया। सहित विभिन्न प्रसंगों का रसपान किया।

मुस्य यजमान राधेश्याम शुक्ल (एडवोकेट)एवं पत्नी इन्दावती ने विधिवत पूजन अर्चन कर लोक मंगल की कामना किया ।

कार्यक्रम के अंत में , सियाराम शुक्ल, शाशिकान्त शुक्ल, अभिषेक, राजेश,अंकुर, संस्कार, रूद, सार्थक सहित अन्य लोगों ने महाराज श्री का माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

कथा में वरिष्ठ पत्रकार श्री जयंत मिश्रा, राज्य मंत्री महेश शुक्ल, संपादक आशुतोष नारायण मिश्रा, युवा पत्रकार आकाश शुक्ल,  पं चन्दभान शुक्ल, अनिल शुक्ल सहित अनेक भक्तगण उपस्थित रहे।

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