बस्ती ( आयुष्मान टाइम्स ) स्वस्थ्य नारी, सशक्त परिवार" अभियान के तहत भारत सरकार द्वारा संचालित हेल्दी वुमन, इम्पावर्ड फैमिलीज कार्यक्रम के अंतर्गत आज बस्ती जिले में एक दिवसीय योग एवं आयुर्वेद कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना और आयुर्वेद एवं योग की विधियों के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना रहा।
कार्यशाला का आयोजन महर्षि वशिष्ठ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, बस्ती में हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, डॉक्टर्स और की सहभागिता रही।
कार्यक्रम में आयुष विभाग शंकरपुर हेल्थ वैलनेस सेंटर में कार्यरत योगाचार्या सन्नो दुबे ने प्रतिभागियों को योगाभ्यास कराते हुए योग के विभिन्न आसनों के लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पंचकर्म, षटकर्म, और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी आयुर्वेदिक प्रक्रियाओं की जानकारी दी और बताया कि कैसे ये विधियाँ न केवल रोगों से मुक्ति दिलाती हैं, बल्कि व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से भी संतुलित बनाती हैं।
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा,"योग व्यायाम के साथ यह जीवन जीने की एक कला भी है। आज के तनावपूर्ण जीवन में योग अपनाकर हम न केवल बीमारियों से दूर रह सकते हैं, बल्कि मानसिक शांति भी प्राप्त कर सकते हैं।"
डॉ. आनंद बिहारी ने योग को आज के युग का वरदान बताते हुए कहा कि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों जैसे मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप आदि में योग और आयुर्वेदिक जीवनशैली अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो सकती है।डॉ. प्रियंका केशरवानी ने औषधीय पौधों की महत्ता पर बात करते हुए कहा कि हमारे आसपास पाए जाने वाले अनेक पौधे, जैसे तुलसी, अश्वगंधा, गिलोय, हल्दी आदि कई बीमारियों के इलाज में कारगर हैं। वहीं डॉ. कमलेश कुमार ने दैनिक दिनचर्या सुधारने की अपील करते हुए कहा कि संतुलित आहार, नियमित योगाभ्यास और समय पर सोने-जागने की आदत से व्यक्ति दीर्घायु और स्वस्थ जीवन जी सकता है।इस कार्यशाला में मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों के डॉक्टरों के साथ-साथ छात्र-छात्राओं ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। सभी ने योगाभ्यास किया और आयुर्वेदिक स्वास्थ्य तकनीकों की जानकारी प्राप्त की। प्रतिभागियों में कार्यशाला को लेकर उत्साह और जागरूकता देखने को मिली।
इस एक दिवसीय कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि योग और आयुर्वेद न केवल भारत की प्राचीन धरोहर हैं, बल्कि आज के समय में भी स्वास्थ्य रक्षा का अत्यंत प्रभावशाली माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों से समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ती है और स्वस्थ्य नारी, सशक्त परिवार जैसे अभियानों को बल मिलता है।


